Archive for October, 2006

भावुक के दोहे

October 2, 2006

    

      जिनगी रोज सवाल
एगो से निपटीं तले, दोसर उठे बवाल ।
केहू कतनो हल करी, ‘जिनिगी रोज सवाल’ ॥1॥
जिनिगी के दालान में का-का बा सामान ।
ख्वाब,पंख,कइंची अउर लोर-पीर मुस्कान  ॥2॥
पाँख खुले त·  आँख ना, आँख खुले त·  पाँख।
एही से अक्सर इहाँ, सपना होला राख ॥3॥
रिस्ता-नाता, नेह सब, मौसम के अनुकूल ।
कबो आँख के किरकिरी, कबो आँख के फूल [...]