फागुन के उत्पात : भइल गुलाबी गाल
हई ना देखs ए सखी फागुन के उत्पात ।
दिनवो लागे आजकल पिया-मिलन के रात ॥1॥
अमरइया के गंध आ कोयलिया के तान ।
दइया रे दइया बुला लेइये लीही जान ॥2॥
ठूठों में फूटे कली, अइसन आइल जोश ।
अब एह आलम में भला, केकरा होई होश ॥3॥
महुआ चुअत पेड़ बा अउर [...]