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Bhojpuri Poet, Writer, and Film-critic.
Archive for the 'Uncategorized' Category
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July 28, 2007January 17, 2007
फागुन के उत्पात : भइल गुलाबी गाल
हई ना देखs ए सखी फागुन के उत्पात ।
दिनवो लागे आजकल पिया-मिलन के रात ॥1॥
अमरइया के गंध आ कोयलिया के तान ।
दइया रे दइया बुला लेइये लीही जान ॥2॥
ठूठों में फूटे कली, अइसन आइल जोश ।
अब एह आलम में भला, केकरा होई होश ॥3॥
महुआ चुअत पेड़ बा अउर [...]
भावुक के दोहे
October 2, 2006
जिनगी रोज सवाल
एगो से निपटीं तले, दोसर उठे बवाल ।
केहू कतनो हल करी, ‘जिनिगी रोज सवाल’ ॥1॥
जिनिगी के दालान में का-का बा सामान ।
ख्वाब,पंख,कइंची अउर लोर-पीर मुस्कान ॥2॥
पाँख खुले त· आँख ना, आँख खुले त· पाँख।
एही से अक्सर इहाँ, सपना होला राख ॥3॥
रिस्ता-नाता, नेह सब, मौसम के अनुकूल ।
कबो आँख के किरकिरी, कबो आँख के फूल [...]